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📖 Katha Shiva
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Solah Somvar Vrat Katha Complete

Language:
सोलह सोमवार व्रत कथा संपूर्ण
॥ श्री सोलह सोमवार व्रत कथा ॥ प्राचीन समय की बात है। अमरावती नगरी में एक अत्यंत भव्य शिव मंदिर था। उस मंदिर में प्रतिदिन राजा, रानी, नगरवासी और साधु-संत भगवान शिव की पूजा करने आते थे। मंदिर में हर सोमवार विशेष पूजा और भजन-कीर्तन होता था। एक दिन माता पार्वती भगवान शिव से चौपड़ खेलने की इच्छा व्यक्त की। भगवान शिव मुस्कुराए और दोनों चौपड़ खेलने लगे। उसी समय मंदिर का पुजारी वहाँ आया। माता पार्वती ने पुजारी से पूछा — “बताओ, इस खेल में कौन जीतेगा?” पुजारी ने बिना सोचे-समझे कह दिया — “भगवान शिव जीतेंगे।” लेकिन खेल में माता पार्वती जीत गईं। पुजारी की बात गलत साबित हुई। माता पार्वती को यह बात अच्छी नहीं लगी। उन्होंने क्रोधित होकर पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया। कुछ ही समय में पुजारी के शरीर में कोढ़ हो गया। वह अत्यंत दुखी रहने लगा। मंदिर में आने वाले लोग उससे दूर रहने लगे। वह दिन-रात भगवान शिव की आराधना करता और क्षमा मांगता रहता। एक दिन कुछ अप्सराएँ मंदिर में पूजा करने आईं। उन्होंने पुजारी की दयनीय स्थिति देखी और कारण पूछा। पुजारी ने सारी घटना बता दी। तब अप्सराओं ने कहा — “यदि तुम श्रद्धा से सोलह सोमवार का व्रत करो, तो भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होंगे।” पुजारी ने व्रत की विधि पूछी। अप्सराओं ने बताया — “प्रत्येक सोमवार प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत से अभिषेक करें। दिन भर व्रत रखें और शिव कथा सुनें। सोलह सोमवार तक यह व्रत श्रद्धा से करें।” पुजारी ने उसी दिन से व्रत आरंभ कर दिया। वह प्रत्येक सोमवार उपवास रखता, शिवलिंग पर जल चढ़ाता और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करता। धीरे-धीरे उसका कोढ़ ठीक होने लगा। सोलहवें सोमवार तक उसका शरीर पूर्णतः स्वस्थ हो गया। भगवान शिव और माता पार्वती उसकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे दर्शन देकर आशीर्वाद दिया। पुजारी ने हाथ जोड़कर कहा — “प्रभु, आपकी कृपा से मेरा जीवन सफल हो गया।” कुछ समय बाद एक निर्धन वृद्धा ने भी यह कथा सुनी। उसका एक पुत्र था जो बहुत आलसी और बेरोजगार था। वृद्धा ने अपने पुत्र को सोलह सोमवार व्रत करने की सलाह दी। पुत्र ने श्रद्धा से व्रत आरंभ किया। कुछ ही दिनों में उसे राजदरबार में नौकरी मिल गई। राजा उसकी बुद्धिमानी और ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुआ। धीरे-धीरे वह राजकाज में महत्वपूर्ण पद पर पहुँच गया। उसका विवाह एक सुंदर और गुणवान कन्या से हुआ। परिवार में सुख और समृद्धि आने लगी। लेकिन विवाह के बाद उसकी पत्नी अहंकारी हो गई। उसने सोमवार व्रत और भगवान शिव की पूजा को महत्व देना बंद कर दिया। धीरे-धीरे परिवार में कलह बढ़ने लगी और धन हानि होने लगी। तब उस युवक ने अपनी पत्नी को भगवान शिव की महिमा समझाई। पत्नी को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने भी श्रद्धा से सोमवार व्रत करना शुरू किया। शीघ्र ही उनके जीवन के सभी दुख दूर हो गए। घर में फिर से सुख, शांति और समृद्धि लौट आई। एक बार एक राजा ने भी इस व्रत की महिमा सुनी। उसकी कोई संतान नहीं थी। उसने रानी सहित सोलह सोमवार व्रत किया। भगवान शिव की कृपा से उन्हें तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। पूरे राज्य में उत्सव मनाया गया। तभी से सोलह सोमवार व्रत की महिमा चारों ओर फैल गई। यह व्रत विशेष रूप से विवाह, संतान प्राप्ति, मनोकामना पूर्ति और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। ॥ व्रत विधि ॥ प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करें। घी का दीपक जलाएँ। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और सोलह सोमवार व्रत कथा पढ़ें। दिन में एक समय फलाहार करें। ॥ उद्यापन विधि ॥ सोलह सोमवार पूर्ण होने पर भगवान शिव का विशेष पूजन करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएँ। गरीबों को दान दें। प्रसाद बाँटें और शिव आरती करें। ॥ व्रत का महत्व ॥ जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से सोलह सोमवार का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, संतान सुख प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ॥ श्री सोलह सोमवार व्रत कथा समाप्त ॥
Solah Somvar Vrat Katha Complete
Complete Solah Somvar Vrat Katha with vrat vidhi, significance and blessings of Lord Shiva for marriage, prosperity and happiness.